आहटो से परे
उम्मीदों से भरे
छोटे से दिल की आशा ।
ऊपर उठें
या उठ के चले
चलते रहने की है अभिलाषा ।
रूठने की वजह कम हैं
हँसने के मौके हैं ज्यादा ।
धूप की तपिश भी नर्म है
बारिश की बूँदें कहाँ कम हैं ।
जो सोचा वही होगा
अगर नहीं हुआ तो भी सही होगा ।
फिर फ़िक्र क्यूँ
चिंता काहे की ।
मस्ती से भरी है दुनिया हमारी
आगे भी यूं ही रहेगी ।।
उम्मीदों से भरे
छोटे से दिल की आशा ।
ऊपर उठें
या उठ के चले
चलते रहने की है अभिलाषा ।
रूठने की वजह कम हैं
हँसने के मौके हैं ज्यादा ।
धूप की तपिश भी नर्म है
बारिश की बूँदें कहाँ कम हैं ।
जो सोचा वही होगा
अगर नहीं हुआ तो भी सही होगा ।
फिर फ़िक्र क्यूँ
चिंता काहे की ।
मस्ती से भरी है दुनिया हमारी
आगे भी यूं ही रहेगी ।।
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